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कहती है मुझसे डर लगता है ?

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वो कुछ न कहती बस अपने में रहती कहती है मुझको क्यों? देखते हो एकटक होकर क्यों ? नहीं रहते अपने में खोकर सुनकर उसकी बातों को एक हँसी निकल पड़ती देखकर मेरे हाव भाव चढ़ जातें है उसके ताँव तपाक से बोलने की आदत ने मुझे हर जगह मरवा दिया जब वक्त आया उससे बोलने का एक प्रश्नचिन्ह लगा दिया रात्रि का तीसरा पहर जिंदगी में फिर बदकिस्मती का कहर कभी खुद सोच ना पाते कभी अपने को बता न पाते बड़ी हिम्मत से ये दिन लाये हम जब सामने खड़ी थी वो जज्बातों को रोक ना पायें हम धड़कने कुछ इस तरह से बढ़ गयी क्या बोलना चाह रहे थे ? ओर क्या बोल गए हम ? कुछ वो सुनती रही कुछ मैं भी उसकी सुनता रहा वो चंद पलो का समय यूँ ही खींचता रहा ना जाने क्यों जज़्बात मेरे होठों पर ना आते है दिल की धड़कने एक थक्का छोड़ जाती है सोचते थे कौतुहल बंद हो जायेगा उससे बात करते-२ वो  दे गई ऐसा गम आज तक भर नहीं पाया ओर रोते -२ थक गए हम !!

हिन्दू धर्म की त्रिमूर्ति ? कौन

हिन्दू धर्म की शुरुआत कहाँ से होती है? और कहाँ से कहाँ से पहुँच सकती है ये कहना लगभग असम्भव सा है ?  जब हिन्दू धर्म की शुरुआत की और देखते है तो सबसे पहले हम त्रिमूर्ति के बारे में जानते है ? हिन्दू धर्म के भौतिक रूप जो की वर्तमान में उपस्थित है को छोड़ देते है | त्रिमूर्ति , मतलब तीन ऐसे देवताओ की कल्पना जो अपने आप में श्रेष्ठ है |  ब्रह्मा  विष्णु  शिव ये तीनो त्रिदेव अपने आप में एक संसार लिए हुए है | और इतना विशाल संसार की आप चाहे तो पूरा जीवन लगा सकते है इन्हें समझने में | असल में ये हमारे मस्तिष्क की तीन सर्वश्रेष्ठ स्तिथि के प्रतिबिम्ब है | ब्रह्मा जहाँ एक और हमारे चतुर्दशी और बहु आयामी बुद्धि को दिखाता है  जिसे वो कुछ भी नया बना सकता है , नया सोच सकता है , नए नए आयाम खोज सकता है | वो गुण सिर्फ ब्रह्मा में है किसी और देवता या बाकी दोनों त्रिमूर्ति में नहीं है | ब्रह्मा ही सब कुछ जानते है भूत ,वर्तमान और भविष्य  सब कुछ लेकिन वो कुछ कर नहीं सकते , आप उनका फायदा नहीं उठा सकते | दुनिया भर की कहानियाँ हमें देखने को मिलती है जहाँ ब्रह्मा जानते हु...

अभिनन्दन का अभिनन्दन और वीर ज़ारा -पार्ट 2

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भारत-पाकिस्तान को टीवी के आईने से देखे तो वो कुत्ते बिल्ली जैसे है | हम ज्यादातर दोनों मुल्को को केवल टीवी के जरिये ही देखते और समझते है | हाल ही के दिनों में जो टीवी पर बवाल कटा है , वो केवल एक बानगी भर है | किस्मत और तकनीक का कमाल ही कहा जा सकता है कि कुछ घंटो के अन्दर ही भारत का एक वीर सैनिक सकुशल अपने घर आ गया है |सरकार को मैं कभी किसी भी तरह का क्रेडिट नहीं देता ,क्यूंकि अपने नागरिको के लिए एक ईमानदार कोशिश करना उसका फ़र्ज़ है,यदि क्रेडिट की बात होगी तो लोग उसे खुद देंगे | विंग कमांडर अभिनन्दन की रिहाई और उनके जीवन को एक नया सवेरा दिखाने में सोशल मीडिया का बड़ा रोल है | भारत ने काफी देर में ये माना की उनका कमांडर उनके कब्जे में है | जबकि पाकिस्तान उनकी विडियो भी जारी कर चूका था | ये एक विडियो उनके लिए संजीविनी से कम नहीं है | जिसके जरिये भारत को पता चला कि उनका कमांडर कहाँ है और कैसा है ? नहीं तो भारत के लिए पता लगाना सालो का खेल हो जाता कि सर अभिनन्दन कहाँ और कैसे है ? लोगो ने सरकार के इस कदम को सराहा , और पिछले हालातो और सरकार के रवियो को जमकर कोसा , कुछ ने पाईलेट कालिया , औ...

आप कितने धार्मिक है ? और कितने धर्मवान है और कितने हो सकते है ||

जब धर्म की बात करते है | तो किसी विशेष धर्म की बात नहीं करना चाहता , चलिए इसको इसका दायरा बढ़ाते है | कुछ सवालों में बात करेंगे और इनका उत्तर ढूंढने का प्रयास करेंगे | धर्म क्या है ? थोडा कर्मकाण्डो से बाहर निकलते है तो पायेंगे धर्म नियति या नियत है | जो लगातार बिना किसी रोक टोक के चला आ रहा है धर्म को परिभाषित नहीं करना चाहिए और ना ही जरुरत है क्यूंकि शब्द के रूप में इसके अर्थ जगह जगह पर बदल जाते है | कुछ आस पास की घटनाओं को लेकर समझने का प्रयास करे कि धर्म का मतलब क्या है ? बरसात के मौसम में बादलो का बरसना, बीजो का अंकुरित होकर पौधे में बदलना-पेड़ बनकर फलो को देना,  ये कुछ भौतिक क्रिया है जो कि लाखो सालो से नियत रूप में चली आ रही है | अपने कर्तव्यो का पालन कर रही है | समय पर इन क्रियाओ में बदलाव देखने को मिलता है, इनकी प्रक्रिया धीमी और तेज़ दोनों होती है , लेकिन इन भौतिक क्रिया का अंतिम लक्ष्य कभी ख़त्म नहीं होता , और ना ही उस लक्ष्य को पाने के तरीके में कोई बदलाव होता है | पौधे हमेशा बीजो के अंकुरण से ही पैदा हो रहे है , बरसात हमेशा बादल ही लेकर आ रहे है | नदिया हमेशा समुद्...

कितनी लेयर चढ़ती है किसी को पेंट करने में | डिजिटल अंगूर |Digital Grapes Painting

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कैसे चढाई है रंगों की परते इन अंगूरों पर खाने से पहले देखिये नीचे विडियो में | मोबाइल फ़ोन में फुल स्क्रीन का प्रयोग करें

फॉर मोर शॉट्स प्लीज| क्या माँगना चाहते हो ?

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वैसे तो एक से एक घटिया वेब सीरीज से इन्टरनेट भर गया है | लेकिन वो सब बाद में , फिलहाल बात करते है अमेज़न प्राइम पर आई नयी वेब सीरीज "फॉर मोर शॉट्स प्लीज" की | जैसा की ज्यादातर वेब सीरीज में होता है कि वो औरतो को केंद्र में रख कर लिखी जा रही है , या एक ऐसा किरदार होता है जिसके चारो और कहानी घुमती है | लेकिन यहाँ पर पूरी तरह से स्कसिसफुल अलग अलग प्रोफेशन की चार महिलाओ की कहानी है जिसमे अजीबो गरीब तरह के दृश्य देखने को मिलते है | ज्यादातर वेबसीरीज , औरतों की कामुकता को बिस्तर पर सुलगाने को कह रही है | फॉर मोर शॉट्स प्लीज में चार औरते है एक डिवोर्स माँ है , एक पत्रकार , एक फिटनेस ट्रेनर , और एक कुछ भी नहीं है | लेकिन शादी से पहले सब कुछ करना चाहती है | चारो को एक "ट्रक" बार में जाकर शराब पीना अच्छा लगता है , चारो को एक दुसरे से हर बात शेयर करना पसंद| लेकिन कमाल की बात है कि चारो की सेक्स लाइफ भी ठप ही पड़ी है | इसलिए चारो को अपनी वेजाइना के बारे में बात करना पसंद है |क्यूँ है , ये मालुम नहीं है | एक दृश्य में चारो औरते अपनी वेजाइना के बारे में बात कर रही ...

अपने पैसे एक्सीडेंटली मत गवाएँ| द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर

फिल्म की शुरुआत होती है लोकसभा २००४ के जीतने से जिसमे कांग्रेस बड़ी पार्टी बनकर उभरी और संयुक्त विकास मोर्चा(UPA) को बहुमत मिला और सोनिया गाँधी के विरोध के साथ | फिल्म में कुछ ऐसा नहीं जिसे आप नहीं जानते कम से कम मैं तो जानता ही हूँ| मैंने सरकारों को लगभग २००३ से फॉलो करा है | और आज भी कर रहा हूँ | ये फिल्म सरकार के किसी भी पहलु को दिखाने में सफल नहीं हुई है | लेकिन भक्तो की एक जमात को ये फिल्म देखने में मजा आ सकता है क्यूंकि इसमें व्हाट्सएप के जैसे डायलॉग है और ऐसी ही सिनेमेटोग्राफी देखने को मिलती है जैसे उनके द्वारा की विडियो के फुटेज में |फिल्म का अंत इसके उदेश्य को स्पष्ट कर देता है जिसमे  "पब्लिशर - चुनावों के वक़्त भी यदि किताब की सेल नहीं तो कब होगी |" इसका सलूशन कुछ ऐसे निकलता है | "संजय बारू की जब नहीं बिकती है तो उसे सनसनीखेज बनाने के लिए एक प्रेस विज्ञप्ति जारी होती है , जिसके बाद किताब तेजी से बिकती है "   वही बात फिल्म के उपर भी लागू होती है | फिल्म पैसे कमाने के लिए बनती है लेकिन इस फिल्म को सुने थिएटर ही नसीब हो रहे है | कुछ ऐसे ...