अग्नि परीक्षा पर कितना खरा उतरेगा | मोदी सरकार का आरक्षण बिल

बुधवार को रात लगभग १० बजे राज्यसभा ने सविंधान संशोधन को हरी झंडी दे दी |  जिसके बाद आरक्षण या सकरात्मक कदम आर्थिक आधार पर भी हो सकेंगे | हांलकि ये चाल कितनी कारगर साबित होगी ये तो आपको मई के महीने में पता चल ही जाएगा | राज्यसभा के कुछ सांसदों के ब्यान जो फिलहाल मुझे याद है यहाँ पर मैं "कोट" करना  चाहूँगा |

"आरक्षण का जन्म क्यूँ हुआ ? ये सरकार उसमे ना जाकर, उसकी बहस(आर्थिक रूप से ) को एक नया रंग देना चाहती है |

"आरक्षण कोई मनरेगा योजना नहीं है जिसमे आइये और नौकरी पाइए
 "आरक्षण जनसँख्या का प्रतिनिधित्व करता है |पिछडो की जनसँख्या ५५% होने के बावजूद उन्हें २७.५ % पर समेट दिया गया |
  आरक्षण की आत्मा कहाँ बस्ती है ? जब किसी व्यक्ति की आज़ादी ,और स्वाभिमान को सिर्फ इसलिए छीन लिया जाता है | कि तुच्छ जाती में पैदा हुआ है | उना, रोहित वेमुला जैसी घटनाएं है जिसकी वजह से आरक्षण को दोबारा से परिभाषित करने की कोई जरुरत नहीं है | जबकिसी को सिर्फ इस बात पर प्रताड़ित किया जाता है कि उसने बड़ी मूछ उगा ली है 
 ये तो कुछ ऐसी बातें थी | मूंह में राम बगल में छुरी, 

मोदी सरकार के मंत्री ने अपने धन्यवाद प्रस्ताव में जो बातें कही , उसकी कुछ बातें को भी कहना चाहूँगा|

मैं जानता हूँ कि संसद के द्वारा पारित होने के बाद भी इस विधयेक को कोर्ट में चुनौती मिलेगी | लेकिन सविधान संशोधन के बाद न्यायलय बाध्य होगा इसे जारी रखने के लिए | मैं आभारी हूँ  पिछड़े और दलित भाइयो का जिन्होंने सामान्य वर्ग के अधिकार को सुनिश्चित करने में वैसे ही मदद करी , जैसे सामान्य वर्ग ने आरक्षण लागू करने में की थी |

इस बिल की अग्नि परीक्षा चुनावों के बाद होगी | जब इसको लागू किया जाएगा , चलिए कुछ ऐसे सवालों को लेते है जो कि उठने लाज़मी है 
  1. १०% आरक्षण के लिए सीटें कहाँ से आएँगी | चलिए शैक्षणिक संस्थानों में सरकार ने १०% सीटें बढाने का फैसला कर लिया है | क्यूंकि वहां सरकार को फीस मिलनी है | क्यूंकि ८ लाख की तन्खाव्ह वालो को तो वजीफा मिलेगा नही | यहाँ से तो हो जाती है कमाई
  2. अब बारी आती है नौकरियों की | जहाँ पर मोदी सरकार या भाजपा सरकार अभी तक फेल रही है | अगर विभाग में १०० आदमी करते है तो वर्तमान व्यवस्था के हिसाब से पहले ही बटे हुए है | तो १०% अतिरिक्त सीट्स कहाँ से पैदा होगी | 
  3. "मेरा भाषण ही शासन" वाली सरकार ने अभी तक इसका ना कोई मैकेनिज्म तैयार किया है | और ना ही अब कोई योजना है |

आखिर किनकी नौकरियाँ खा जाएगा ये बिल |


नौकरियों में १०% सीट्स सिर्फ इसलिए बढ़ा देना कि ये आर्थिक गरीबो के लिए है | कितना सही है ? और क्या सच में सरकार इन १०% अतिरिक्त नौकरियों का बोझ उठाने के लिए तैयार है | जिस हिसाब से सरकार नौकरियों में कटौती कर रही है | उस हिसाब से सरकार की टेढ़ी नज़र अनुसूचित जाति व जनजाति की सीटो के ऊपर भी हो सकती है जो की योग्य उम्मीदवार ना मिलने के कारण रिक्त रह जाती है | बाद में उन्हें सामन्य में बदल कर भर लिया जाता है |  आज भी लाखो पद अनुसूचित जाति व जनजाति के रिक्त है क्यूंकि इस समाज में आज भी शिक्षा का स्तर निम्न श्रेणी का है | बहुत से छात्र दसवी के बाद पढाई छोड़ घर के कामो में लग जाते है या उनकी जिंदगी इतनी कठिन होती है कि वो पढ़ते तो रहते है लेकिन वो चाह कर भी किसी से प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकते |


कितनी खामियों से भरा है ये आरक्षण बिल और इसकी अग्नि परीक्षा

किसी विधार्थी को अतिरिक्त मदद की आवश्यकता है ये कैसा पता चलेगा, जब उसका रिपोर्ट कार्ड आएगा उसके नंबर देखेंगे , तब पता चलेगा कि किस विषय में उसको ट्यूशन या ज्यादा पढने की जरुरत है | 

अनुसूचित जाति व् जनजाति के आरक्षण का एक लम्बा इतिहास रहा है | डॉ. आंबेडकर ने इसे कैसे पहले अंग्रेजो से लिया उसके बाद भारत की संसद से भी लिया | इसमें उनकी एक लम्बी रिसर्च और डाटा का एनालिसिस शामिल है |  उसके बाद जब रातो रात पिछडो के लिए आरक्षण की घोषणा हुई जैसा हाल ही में सामान्य वर्ग के गरीब तबके के लिए हुई है चुनावों के बाद वो कोर्ट में औंधे मुंह गिर गया | ऐसा सिर्फ इसलिए नही कि वो गलत था बल्कि सरकार के पास कोई डाटा ही नहीं था तब सरकार ने मंडल कमिशन का गठन किया जिसने उन जातियों का पता लगाया जो पिछडो में आरक्षण के लायक थी |  जिसकी रिपोर्ट को सालो बाद लागू कर पिछडो को २७.५% आरक्षण लागु किया गया , सिर्फ कोर्ट के फैसले को सर माथे बिठाने के लिए उसमे पिछडो के प्रतिनिधित्वमें आधे की कटौती की गयी | जबकि आरक्षण नौकरी की गारंटी नहीं वो देश की प्रगति में प्रतिनिध्त्व सुनिश्चित करता है | और इसका एक मात्र आधार जनसंख्या है |


  • सरकार को अभी वो कैलकुलेशन बतानी बाकी है जिसमे ५ लाख कमाने वाला पिछड़ा "अमीर" और ८ लाख कमाने वाला सामान्य "गरीब" हो जाता है 
  • सरकार ने १०% का आंकड़ा कहाँ से लिया | क्या १० % लोग ही सामान्य जाति के ८ लाख से कम कमाते है |
  • सरकार ने ८ लाख का इनकम क्राइटेरिया कहाँ से निकाला?
  • धर्म के नाम पर आरक्षण की मुकाल्फ्त करने वाली भाजपा क्या इसमें अन्य धर्मो के गरीबो को भी शामिल करेगी | यदि वो करती है तो पिछड़े तो मुसलमानों में भी है तो उनको हिन्दुओ के पिछड़े आरक्षण में लाभ क्यूँ नहीं ?
  • सरकार के पास वर्तमान में इनकम को पता लगाने का कोई कारगर तरीका नहीं है | और ना ही किसी के पास सम्पति कितनी है सरकार पता लगा सकती है | या अब सरकार का अगला कदम , जमीन को भी आधार से जोड़ने का हो सकता है .
और बड़ी शर्म की बात जिस बिल पर आने वाली पीढ़ियों का भविष्य निर्भर करता है उसे बिना होम वर्क किये पारित कर दिया गया है | भविष्य में किसके आरक्षण पर कैंची चलने वाली है ये देखने वाली बात रहेगी |




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